Sunday, June 7, 2020

फणीश्वरनाथ रेणु साहित्य पर वेबिनार संपन्न ।


किशोरी रमण पी जी कॉलेज, मथुरा , वृन्दावन शोध संस्थान ,वृन्दावन व के एम अग्रवाल महाविद्यालय , कल्याण ( महाराष्ट्र) के संयुक्त तत्वावधान में आज दिनांक 7/6/2020 को  जाने माने साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु की जन्मशती पर राष्ट्रीय विवेनार आयोजित की गई ।
उदघाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी , अलीगढ़ हिंदी के चैयरमैन प्रोफेसर रमेश रावत ने कहा कि वर्तमान कोरोना काल में रेणु का साहित्य संजीवनी है , जो मजदूरों के पुनर्वास की समस्या के समाधान की ओर इंगित करता है ।मुख्यवक्ता इंदिरा गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ,नई दिल्ली के प्रोफेसर एवम निदेशक पर्यटन एवम आतिथ्य केंद्र ने कहा कि रेणु का साहित्य सांवला है ।भारत भूमि भी साँवली है जहां की आत्मा मजदूरो , किसानों आदि में बसती है , के सांवले , सूखे होंठों पर मुस्कान लाना है ।मुख्य अतिथि प्रोफेसर प्रदीप श्रीधर , निदेशक , के एम आई , डॉ भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा ने कहा कि रेणु आशावादी है , पलायन नही करते । येही जीवनी शक्ति हमे इन परिस्थितियों में आगे बढ़ने में मदद करने में सहायक है।
कार्यक्रम में 1500 प्रतिभागी इंटरनेट के माध्यम से विविनार से जुड़े रहे ।  जोकि सिक्किम यूनिवर्सिटी, कोलकत्ता यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी, महात्मा गांधी केन्दिय यूनिवर्सिटी , जे एन यू , बी एच यू ,  इग्गनु, डॉ आंबेडकर यूनिवर्सिटी आदि से संबंधित है ।
वक्ताओं में प्रोफेसर वेद प्रकाश , प्रोफेसर देवेंद्र गुप्ता , प्रोफेसर सतपाल शर्मा , प्रोफेसर जया परीदर्शनी , प्रोफेसर अंजनी , प्रोफेसर प्रदीप , प्रोफेसर मृत्युंजय पांडेय, प्रो वेद प्रकाश, डॉ उषा आलोक दुबे, डॉ अनिता मन्ना, डॉ अनिल सिंह आदि कार्यक्रम से जुड़े रहे ।कार्यक्रम किशोरी रमण महाविधालय के प्राचार्य अजय त्यागी व के एम अग्रवाल कॉलेज , कल्याण के प्राचार्या डॉ अनिता मन्ना के उद्बोधन के साथ प्रारम्भ हुआ व श्री एस सी दीक्षित के धन्यवाद ज्ञापन के उपरांत सम्पन्न हुआ , कार्यक्रम को डॉ संजीव श्रीवास्तव व डॉ मनीष मिश्रा ने संयोजित कर संचालन किया ।
डॉ शशिकिरण , डॉ कामना , डॉ देवेंद्र , डॉ नीतू गोस्वामी आदि आयोजन समिति की भूमिका उल्लेखनीय रही ।

































https://youtu.be/toHfEIkSfJEhttps://youtu.be/ICbrUqVz7P8

Thursday, June 4, 2020

रेणु साहित्य पर आयोजित किया गया वेबिनार ।

आप सभी प्रतिभागी मित्रों  को  प्रणाम,
के एम अग्रवाल महाविद्यालय कल्याण, किशोरी रमण (पी.जी.) कालेज मथुरा एवं वृन्दावन शोध संस्थान, वृंदावन के संयुक्त तत्वावधान में 07 जून 2020 को आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में आप सभी का स्वागत है ।   वेबिनार ठीक सुबह 10.30 बजे शुरू होगा ।
इस आयोजन  में आप हमारे यूट्यूब चैनल
 https://www.youtube.com/channel/UCQt-m70CCCS_DU5BvvxHDfg?view_as=subscriber
के  माध्यम से जुड़ सकेंगे ।
अपनी उपस्थिती आप चैट माध्यम से दर्ज करा सकते हैं । अपने प्रश्न एवं प्रतिक्रियाएँ भी आप वहीं लिख सकते हैं ।
आप से अनुरोध है कि आप Telegram Group से भी जुड़ जाईयें ताकि सारी सूचनाएँ आसानी से आप तक पहुँच सके ।  https://t.me/joinchat/RvbFShv7LEIkhD6UNBnswg फीड बैक फार्म का लिंक भी आप को यहीं मिलेगा ।
आप सभी से सहयोग की अपेक्षा है ।

Tuesday, June 2, 2020

अकादमिक दृष्टि से करोना काल के कुछ सकारात्मक पक्ष ।

अकादमिक दृष्टि से करोनाकाल के कुछ सकारात्मक पक्ष।

सकारात्मक पक्ष :
1. जिस विश्व व्यवस्था की अंधी दौड़ में हम शामिल थे उसके प्रति एक निराशा भाव जागृत होना ।
2. ग्लोबल के बदले लोकल के महत्व को हम समझ सके । इसकी स्वीकार्यता बढ़ी ।
3. आत्मनिर्भरता को नए तरीके से समझने की पहल शुरू हुई । हमारी आत्मकेंद्रियता  आत्मविस्तार के लिए प्रेरित हुई ।
4. तकनीक का शैक्षणिक क्षेत्र में बोलबाला बढ़ा । ऑनलाईन व्याख्यानों, वेबिनारों इत्यादि की बाढ़ सी आ गई ।
5. सोशल मीडिया पर  गंभीर अकादमिक दखल बढ़े ।
6.  अध्ययन अध्यापन से जुड़ी सामग्री बड़े पैमाने पर  इंटरनेट पर उपलब्ध हो सकी ।
7. ऑनलाईन व्याख्यानों, कक्षाओं इत्यादि से जिम्मेदारी और पारदर्शिता दोनों बढ़ी ।
8. घर से कार्य / work from home  अधिक व्यापक और व्यावहारिक रूप में दिखाई पड़ा ।
9. तकनीक का बाज़ार अधिक संपन्न हुआ ।
10. रचनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ी ।
11. करोना काल को लेकर अकादमिक शोध और चिंतन की नई परिपाटी शुरू हुई ।
12. ऑनलाईन शिक्षा नए विकल्प के रूप में अधिक संभावनाशील होकर प्रस्तुत हुई ।
13. अकादमिक गुटबाज़ी और लिफाफावाद की संस्कृति क्षीण हुई ।
14. अकादमिक आयोजनों में पूंजी का हिस्सा कम हुआ ।
15. पत्र पत्रिकाओं के ई संस्करण निकले जो अधिकांश मुफ़्त में उपलब्ध कराए गए ।
16. भारतीय भाषाओं के तकनीकी प्रचार प्रसार को बल मिला ।
17. शिक्षकों के शिक्षण प्रशिक्षण का अकादमिक खर्च कम हुआ ।
18. सामाजिक भाषाविज्ञान की नई अवधारणाएं  शोधपत्रों एवं आलेखों के माध्यम से प्रस्तुत हुईं ।
19. ऑनलाईन पुस्तकालयों का महत्व बढ़ा ।
20. लिखे हुए और कहे हुए के प्रति जिम्मेदारी बढ़ी ।
21. पारिवारिक मनोविज्ञान और "स्पेस सिद्धांतों" को लेकर नई अकादमिक चर्चाओं ने जोर पकड़ा ।
22. धार्मिक मान्यताओं, परम्पराओं इत्यादि को करोना काल में नए संदर्भों के माध्यम से प्रस्तुत करने की पुरजोर कोशिश लगभग सभी धर्म और पंथों के लोगों ने की ।
23. लोक कलाओं और संगीत के बड़े आयोजन ऑनलाईन किए गए ।
24. मोबाईल अपनी स्क्रीन से स्क्रीनवाद का प्रणेता  बनकर उभरा ।
25. नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, ज़ी फाइव, मैक्स प्लयेर, अल्ट बालाजी और डिजनी हॉट स्टार की वेब सिरीज़ सिनेमाई जादूगरी की को दुनियां है जो लॉक डॉउन के बीच अधिक लोकप्रिय रही । सिनेमा और लोकप्रियता के अकादमिक अध्ययन को इन्होंने नई चुनौती दी ।
26. वैक्सीन /  के शोध और उत्पादन की क्षमता में क्रांतिकारी  बदलाव के संकेत मिले ।
27. साफ़ सफ़ाई और स्वच्छता को लेकर जागरुकता न केवल बढ़ी अपितु व्यवहार में भी परिवर्तित हुई । इस पर गंभीर लेखन कार्य भी बढ़ा ।
28. दूरस्थ शिक्षा संस्थानों एवं उनकी प्रणालियों का महत्व बढ़ा ।
29. प्रवासी भारतीय मजदूरों को लेकर भी साहित्य प्रचूर मात्रा में उपलब्ध हुआ ।
30. करोना काल का पर्यावरण एवं प्रदूषण पर प्रभाव को लेकर भी कई शोध पत्र सामने आए जिनकी व्यापक चर्चा भी हुई ।
31. नए तकनीकी जुगाड इजाद होने लगे जिससे कम से कम खर्चे में अकादमिक गतिविधियों को संचालित किया जा सके या उनमें शामिल हुआ जा सके ।
32. फेसबुक, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया के लोकप्रिय माध्यम अकादमिक गतिविधियों के बड़े प्लेटफॉर्म बनकर उभरे ।
33. तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली बड़ी कंपनियों में स्पर्धा बढ़ी जिसका फायदा अकादमिक जगत को हुआ ।
34. ऑनलाईन लेनदेन की प्रवृति बढ़ी जिससे ऑनलाईन वित्तीय प्रबंधन और कॉमर्स को लेकर नए डेटा के साथ शोध कार्यों की अच्छी दखल देखने को मिली ।
35. रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में आयुर्वेदिक नुस्खे खूब पढ़े गए और वैश्विक स्तर पर इनपर नए शोध कार्यों की संभावना को बल मिला ।
36. पारिवारिक और सामाजिक संबंधों पर करोना काल के प्रभाव को लेकर समाज विज्ञान में नई अकादमिक बहसों और मान्यताओं/ संकल्पों इत्यादि की चर्चा जोर पकड़ने लगी ।
37. कई अनुपयोगी और बोझ बन चुकी सामाजिक मान्यताओं और परंपराओं का अंत हो गया जिसे साहित्य की अनेकों विधाओं के माध्यम से लेखकों, चिंतकों ने सामने भी लाया ।
38. शिक्षक और विद्यार्थी अधिक प्रयोगधर्मी हुए ।
39. तकनीक के माध्यम से "टीचिंग टूल्स" का प्रयोग बढ़ा ।
40. शिक्षण प्रशिक्षण सामग्री का "इनपुट" और "आऊट पुट" दोनों बढ़ा ।
41. मौलिकता और कॉपी राईट को लेकर भी नए सिरे से अकादमिक गतिविधियों की शुरुआत हुई ।
42. शुद्धतावाद को किनारे कर के तमाम भारतीय भाषाओं ने दूसरी भाषा के कई शब्दों को आत्मसाथ किया । फ़िर इन शब्दों का भारतीयकरण होते हुए उसके कई रूप और अर्थ विकसित होने लगे ।
43. गोपनीय समूह भाषाओं और समूह गत आपराधिक भाषाओं में करोना काल के कई शब्दों का उपयोग बढ़ा जो अध्ययन और शोध की एक नई दिशा हो सकती है ।
44. सरकारी नीतियों और योजनाओं में आमूल चूल परिवर्तन हुए जो भविष्य की राजनीति और अर्थवयवस्थाओं के परिप्रेक्ष्य में किए गए । इनकी गंभीर और व्यापक चर्चा अर्थशास्त्र और वाणिज्य के क्षेत्र में शुरू हुई है ।
45. वैश्विक राजनीति की दशा और दिशा दोनों में बड़े व्यापक बदलावों की चर्चा भी राजनीति शास्त्र के नए अकादमिक विषय बने ।
46. भविष्य में शिक्षक और शिक्षण संस्थानों की स्थिति और उनकी भूमिका को लेकर भी गंभीर चर्चाएं शुरू हुई ।
47. देश में परीक्षा प्रणाली में सुधार और बदलाव दोनों को लेकर चर्चा तेज हुई ।
48. COVID 19  के विभिन्न पक्षों पर शोध के लिए सरकारी गैर सरकारी संगठनों / संस्थानों द्वारा आवेदन मंगाए गए ।
49. बड़े स्तर पर अकादमिक संस्थानों में आपसी ताल मेल बढ़ा ।
50. अंतर्विषयी संगोष्ठियों एवं शोध कार्यों को अधिक मुखर होने का मौका मिला ।

                       डॉ मनीष कुमार मिश्रा
                       के एम अग्रवाल महाविद्यालय
                       कल्याण पश्चिम, महाराष्ट्र
                       www.manishkumarmishra.com
                       manishmuntazir@gmail.com

काव्य रचना में प्रथम पुरस्कार ।