के.एम.अग्रवाल कला,वाणिज्य और विज्ञान महाविद्यालय, कल्याण(पश्चिम) - हिंदी विभाग
Friday, March 13, 2026
Sunday, February 8, 2026
SYBA Semester-IV Subject Selections (A.Y. 2025–26)
SYBA Semester-IV Subject Selections (A.Y. 2025–26)
Following are the Subjects for SYBA Semester-IV NEP-2020. Please take note of it.
History – Major 1History of Medieval India 1526 to 1707 CE – 1313111
Economics – Major 1Macroeconomics II – 1303111
Political Science – Major 2Public Administration – 1323111
Geography – Major 2Urban Settlement – 1573111
Marathi – Major 2Katha ya Sahitya Prakaracha Abhyas – 1383111
Hindi – Major 2Madhyakalin aur Aadhunik Kavya – 1373111
History – Major 2Age of Revolutions (1765 CE to 1950 CE) – 1313112
VSCFoundation of Applied History – 1313413
VSCEntrepreneurship Development – 1303413
Economics – Major 2International Banking and Finance – 1303112
Environmental Management and Sustainable Development – I (OE–I)1573311
Field Project – HISTORY2523625
FP – ECO2523625
History – Major 1bHistory of Medieval Deccan (1200–1680 CE) – 1313113
Economics – Major 1bBanking in India II – 1303113
AEC – Communication Skills in English II
CC CULTURAL
CC NCC
CC NSS – Youth and Disaster Management
CC SPORTS
OE – Principles of Investment (Compulsory to all)
Thursday, February 5, 2026
Willson College Mumbai BOS
appointed as Principal nominee in the category Experts from outside the Autonomous College on the Board of Studies for a tenure of three years 2026-27, 2027-28 and 2028-29 in the subject of Hindi.
Wednesday, February 4, 2026
FYBA MAJOR PROJECT TOPICS/ SEM 2
FYBA MAJOR PROJECT TOPICS/ SEM 2
आप लोग इन विषयों में से किसी एक विषय पर अपना प्रोजेक्ट तैयार कीजिए। 10 से 12 पन्नों का प्रोजेक्ट लिख कर गूगल फॉर्म के द्वारा जमा कर दीजिए। अपना प्रोजेक्ट गूगल फॉर्म के माध्यम से pdf file के रूप में अपलोड कर के भेजो https://forms.gle/ZATV9hq9EdyEaqQ6A
Last date: 1 March 2026
‘फैसला’ कहानी में नैतिक द्वंद्व और सामाजिक दबाव – भीष्म साहनी
‘बहादुर’ में श्रमिक वर्ग की त्रासदी – अमरकांत
‘आशा के आयाम’ में स्त्री संघर्ष का चित्रण – मालती जोशी
‘बेटी’ कहानी में पारिवारिक संरचना और स्त्री अस्मिता – मैत्रेयी पुष्पा
भीष्म साहनी और अमरकांत की कहानियों में यथार्थवाद की तुलना
मैत्रेयी पुष्पा की कहानियों में स्त्री चेतना का विकास
‘नेता नहीं, नागरिक चाहिए’ में लोकतांत्रिक चेतना – रामधारी सिंह ‘दिनकर’
‘बदलू’ में भारतीय श्रम संस्कृति का चित्रण – महादेवी वर्मा
महादेवी वर्मा के संस्मरणों में करुणा और मानवीय संवेदना
‘नेता नहीं, नागरिक चाहिए’ में समकालीन प्रासंगिकता
‘बाईस वर्ष बाद’ में स्मृति और आत्मबोध – बनारसीदास चतुर्वेदी
‘स्वामी दयानंद’ में सुधार आंदोलन का प्रभाव – मोहन राकेश
13. एक मूर्ति कथा’ में कला और जीवन का संबंध – शंकर पुण्डरीकर
रेखाचित्र और जीवनी विधा का तुलनात्मक अध्ययन
‘मकड़ी का जाला’ में सामाजिक शोषण – जयशंकर प्रसाद माधुर
‘कम्प्यूटर: नई क्रांति की दस्तक’ में तकनीकी परिवर्तन – गुणाकर मुले
‘सिंधु की नदी नर्मदा’ में प्रकृति और संस्कृति का संगम – अमृतलाल नागर
Major Hindi SYBA Project Topics / Sem 4
Project Topics
Major Hindi SYBA Project Topics / Sem 4
आप लोग इन विषयों में से किसी एक विषय पर अपना प्रोजेक्ट तैयार कीजिए। 10 से 12 पन्नों का प्रोजेक्ट लिख कर गूगल फॉर्म के द्वारा जमा कर दीजिए।अपना प्रोजेक्ट गूगल फॉर्म के माध्यम से pdf file के रूप में अपलोड कर के भेजो
https://forms.gle/ZATV9hq9EdyEaqQ6A
1. मैथिलीशरण गुप्त की ‘मनुष्यता’ में मानवतावाद का स्वर
2. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की ‘वह तोड़ती पत्थर’ में नारी संघर्ष
3. सोहनलाल द्विवेदी की कविता में राष्ट्रीय चेतना
4. हरिवंशराय बच्चन की ‘जो बीत गई सो बात गई’ में जीवन-दर्शन
5. रामावतार त्यागी की ‘अपना अहम नहीं बचाऊँ’ में नैतिक मूल्य
6. दिनकर सोनवलकर की ‘शीशे और पत्थर का गणित’ में सामाजिक यथार्थ
7. नागार्जुन की ‘आज सड़कों पर लिखे हैं’ में जनसंघर्ष
8. चंद्रकांत देवताले की ‘माँ पर नहीं लिख सकता कविता’ में संवेदना
9. राजेश जोशी की ‘विकल्प’ में सामाजिक परिवर्तन की आकांक्षा
10. ओमप्रकाश वाल्मीकि की ‘एक और युद्ध’ में दलित चेतना
11. अरुण कमल की ‘नए इलाके में’ में शहरी अनुभव
12. निर्मला पुतुल की ‘उतनी दूर मत ब्याहना बाबा’ में आदिवासी जीवन
13. तुलनात्मक एवं समग्र अध्ययन
आधुनिक कविता में सामाजिक यथार्थ का स्वरूप
14. स्त्री चेतना: निराला से निर्मला पुतुल तक
15. कविता में संघर्ष और प्रतिरोध का स्वर
16. मध्यकालीन भक्ति काव्य और आधुनिक कविता में मानव मूल्य
17. ‘स्वयंभ्रम’ में आधुनिक मनुष्य की विडंबना
17. ‘स्वयंभ्रम’ में प्रतीक और बिंब योजना
18. ‘स्वयंभ्रम’ में काव्य भाषा और शिल्प सौंदर्य
Tuesday, February 3, 2026
Sunday, January 18, 2026
Saturday, January 17, 2026
अमरकांत जन्मशती पर के एम अग्रवाल महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न ।
अमरकांत जन्मशती पर के एम अग्रवाल महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न ।
कल्याण (पश्चिम) स्थित के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय में हिन्दी विभाग, महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद,(आई.सी.सी.आर.),नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में 16–17 जनवरी 2026 को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी अत्यंत सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से पधारे प्रतिष्ठित विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।संगोष्ठी का उद्घाटन सत्र महाविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय नारायण पंडित के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. शीतला प्रसाद दुबे ने की। बीज वक्तव्य बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी से आए प्रो. मनोज सिंह (बी.एच.यू.) द्वारा दिया गया, जिसमें हिन्दी साहित्य और समकालीन विमर्श के विविध पक्षों पर गहन विचार प्रस्तुत किए गए। मुख्य अतिथियों के रूप में श्रीमती रेनू पृथियानी (ज़ोनल डायरेक्टर आई.सी.सी.आर., मुंबई) की गरिमामयी उपस्थिति रही। स्वागताध्यक्ष श्री ओम प्रकाश (मुन्ना) पाण्डेय (सचिव, के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय) ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रस्ताविकी डॉ. अनिता मन्ना (प्राचार्या, के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय) द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसमें संगोष्ठी के उद्देश्य, वैचारिक पृष्ठभूमि एवं अकादमिक महत्व को रेखांकित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय प्रबंधन समिति के श्री कांतिलाल जैन, श्री अनिल पंडित, डॉ सुजीत सिंह एवं श्री विजय तिवारी जी उपस्थित थे ।
उद्घाटन सत्र में कुल चार पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ जिसमें अमरकांत पर लिखे लेखों का संग्रह, मध्य एशिया में हिन्दी से जुड़े लेखों का संग्रह, पंडित विद्यानिवास मिश्र पर केन्द्रित समीचीन पत्रिका के अंक के साथ साथ डॉ विजय नारायण पंडित का नवीनतम कहानी संग्रह ‘बड़े भाग मानुष तन पायो’ प्रमुखता से शामिल रहा । दो दिनों में कुल पाँच अकादमिक सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें हिन्दी साहित्य, आलोचना, संस्कृति, समकालीन विमर्श और शोध की नवीन प्रवृत्तियों पर गहन चर्चा हुई। प्रत्येक सत्र में देशभर से आए विद्वत् संदर्भ-वक्ताओं ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। सत्रों की अध्यक्षता एवं संचालन प्रख्यात शिक्षाविदों द्वारा किया गया, जिससे संगोष्ठी का अकादमिक स्तर अत्यंत समृद्ध रहा।
प्रथम अकादमिक सत्र की अध्यक्षता प्रो. दिलीप मेहरा (आचार्य एवं अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, सरदार पटेल विश्वविद्यालय, आणंद, गुजरात) ने की। इस सत्र में अतिथि विशेष के रूप में प्रो. सारिका कालरा (प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, लेडी श्री राम कॉलेज फॉर विमेन, नई दिल्ली), डॉ. सचिन गपाट (प्राध्यापक, हिन्दी विभाग, मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई) तथा डॉ. महात्मा पाण्डेय (एसोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली) की गरिमामयी उपस्थिति रही।सत्र में देश के प्रतिष्ठित विद्वानों ने विद्वत् संदर्भ-वक्ता के रूप में अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इनमें, डॉ. उषा आलोक दुबे (सहायक प्राध्यापिका, हिन्दी विभाग, एम.डी. महाविद्यालय, परेल, मुंबई) तथा श्रीमती पूर्णिमा पाण्डेय (शोध छात्रा, एम.डी. कॉलेज, मुंबई) शामिल रहे। वक्ताओं ने अपने शोधपत्रों के माध्यम से हिन्दी साहित्य के विविध समकालीन, आलोचनात्मक एवं सांस्कृतिक पक्षों पर गहन विमर्श प्रस्तुत किया।
इस सत्र का कुशल एवं प्रभावी संचालन डॉ. तेज बहादुर सिंह (प्राध्यापक, हिन्दी विभाग, आर.जे. कॉलेज, घाटकोपर) द्वारा किया गया। सत्र के संयोजक के रूप में डॉ. अनघा राणे (उप-प्राचार्या, के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय, कल्याण पश्चिम) ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह सत्र विद्वत् संवाद, वैचारिक गहराई और अकादमिक गंभीरता के लिए विशेष रूप से सराहनीय रहा।
द्वितीय अकादमिक सत्र की अध्यक्षता प्रो. सतीश पाण्डेय (पूर्व अधिष्ठाता, सोमैया विश्वविद्यालय, विद्याविहार, मुंबई) ने की। इस सत्र में अतिथि विशेष के रूप में प्रो. पुरुषोत्तम कुंदे (प्राचार्य, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज, शेवगाव, अहिल्यानगर) की गरिमामयी उपस्थिति रही। सत्र में विद्वत् संदर्भ-वक्ताओं के रूप में प्रो. श्यामसुंदर पाण्डेय (प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, बी.के. बिर्ला महाविद्यालय, कल्याण पश्चिम), डॉ. रीना सिंह (एसोसिएट प्राध्यापिका, हिन्दी विभाग, आर.के.टी. महाविद्यालय, उल्हासनगर), डॉ. मनोज दुबे (अध्यक्ष, आधुनिक विभाग, सनातन धर्म आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, हरियाणा) तथा श्रीमती किरण गोस्वामी (शोध छात्रा, एम.डी. कॉलेज, परेल) ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने हिन्दी साहित्य के समकालीन परिदृश्य, तुलनात्मक साहित्य, आलोचना तथा सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों पर विचारोत्तेजक विमर्श प्रस्तुत किया।इस सत्र का प्रभावी एवं संतुलित संचालन एवं संयोजन डॉ. संतोष कुलकर्णी (उप-प्राचार्य, के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय, कल्याण पश्चिम) ने की। यह सत्र अकादमिक गंभीरता, वैचारिक विविधता और समृद्ध संवाद के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।
तृतीय अकादमिक सत्र की अध्यक्षता प्रो. ईश्वर पवार (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, सी.टी. बोरा महाविद्यालय, शिरुर) ने की। इस सत्र में अतिथि विशेष के रूप में प्रो. संतोष मोटवानी (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, आर.के.टी. महाविद्यालय, उल्हासनगर) की गरिमामयी उपस्थिति रही। सत्र में विद्वत् संदर्भ-वक्ताओं के रूप में देश के विभिन्न राज्यों से पधारे विद्वानों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इनमें डॉ. नीलाभ (सहायक प्राध्यापक, हिन्दी विभाग, स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेज़ी माध्यम आदर्श महाविद्यालय, अंबिकापुर, छत्तीसगढ़), डॉ. कुंजन आचार्य (सहायक प्राध्यापक, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर, राजस्थान), तथा डॉ. गीता यादव (एसोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, एस.एम.आर.के.–बी.के.–ए.के. महिला महाविद्यालय, नाशिक) शामिल रहीं। वक्ताओं ने हिन्दी साहित्य, मीडिया-अध्ययन, समकालीन विमर्श एवं अंतर्विषयक अध्ययन के विविध पक्षों पर गंभीर और विचारोत्तेजक प्रस्तुति दी। इस सत्र का सुचारु एवं प्रभावी संचालन एवं संयोजन डॉ. बी.के. महाजन (वरिष्ठ प्राध्यापक, भूगोल विभाग, के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय, कल्याण पश्चिम) ने की। यह सत्र विषयवस्तु की विविधता, राष्ट्रीय सहभागिता और अकादमिक गहनता के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।
चतुर्थ अकादमिक सत्र की अध्यक्षता प्रो. मिथलेश शर्मा (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, आर.जे. महाविद्यालय, घाटकोपर, मुंबई) ने की। इस सत्र में अतिथि विशेष के रूप में प्रो. बालकवि सुरंजे (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, बी.के. बिर्ला महाविद्यालय, कल्याण पश्चिम) तथा डॉ. ईश्वर आहिर (कार्यकारी अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, श्री गोविंद गुरु विश्वविद्यालय, गोधरा, गुजरात) की गरिमामयी उपस्थिति रही। सत्र में विद्वत् संदर्भ-वक्ताओं के रूप में डॉ. भावना रोचलानी (सहायक प्राध्यापिका, हिन्दी विभाग, सी.एच.एम. कॉलेज, उल्हासनगर), श्रीमती सुप्रिया शशिकांत माने (सहायक प्राध्यापक, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, मुंबई), डॉ. ममता माली (प्राध्यापिका, सोमैया डी.एड. कॉलेज, घाटकोपर, मुंबई) तथा नंदिनी अरुण कुमार शुक्ला (प्राध्यापिका, हिन्दी विभाग, विल्सन महाविद्यालय, मुंबई) ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। प्रस्तुतियों में हिन्दी साहित्य के समकालीन प्रश्नों, स्त्री-विमर्श, शिक्षण पद्धतियों तथा सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों पर गहन और सार्थक विमर्श हुआ। इस सत्र का सुचारु एवं संतुलित संचालन डॉ. कंचन यादव (प्राध्यापिका, हिन्दी विभाग, एस.पी.एन.डी. विमेन्स कॉलेज, मुंबई) द्वारा किया गया। सत्र के संयोजक के रूप में प्रो. मुनीष पाण्डेय (प्रोफेसर, भौतिकी विभाग, के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय, कल्याण पश्चिम) ने आयोजन के समन्वय एवं व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह सत्र विचार-विविधता, अकादमिक अनुशासन और संवादपरकता के लिए विशेष रूप से सराहनीय रहा।
पंचम अकादमिक सत्र की अध्यक्षता डॉ सतीश पाण्डेय जी ने की। इस सत्र में अतिथि विशेष के रूप में डॉ. रीना थॉमस (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, संत ऐलोयसिस कॉलेज (स्वायत्त), जबलपुर, मध्यप्रदेश) तथा डॉ. सुनीता कुजूर (सहायक प्राध्यापिका, हिन्दी विभाग, शासकीय महाविद्यालय, बरगी, जबलपुर, मध्यप्रदेश) की गरिमामयी उपस्थिति रही। सत्र में विद्वत् संदर्भ-वक्ताओं के रूप में डॉ. सत्यवती चौबे (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, विल्सन महाविद्यालय, मुंबई), डॉ. प्रवीण चंद्र बिष्ट (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, रामनारण रूइया स्वायत्त महाविद्यालय, मुंबई), डॉ. सुनीता क्षीरसागर (सहायक प्राध्यापिका, हिन्दी विभाग, सी.एच.एम. कॉलेज, उल्हासनगर) तथा डॉ. ममता माली (प्राध्यापिका, सोमैया डी.एड. कॉलेज, घाटकोपर, मुंबई) ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने हिन्दी साहित्य के समकालीन विमर्श, अकादमिक नेतृत्व, संस्थागत भूमिका तथा सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों पर गहन और विचारोत्तेजक प्रस्तुतियाँ दीं। इस सत्र का सुसंगत एवं प्रभावी संचालन डॉ. गीतांजलि त्रिपाठी (प्राध्यापिका, हिन्दी विभाग, एस.पी.एन.डी. विमेन्स कॉलेज, मुंबई) द्वारा किया गया। सत्र ने राष्ट्रीय संगोष्ठी को वैचारिक ऊँचाई प्रदान करते हुए अकादमिक संवाद को समृद्ध किया तथा समापन की ओर एक सशक्त बौद्धिक आधार निर्मित किया।
समापन सत्र में प्रतिभागियों ने संगोष्ठी को अत्यंत उपयोगी, शोधोन्मुखी और संवादपरक बताया। समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ. अनिता मन्ना ने की। इस अवसर पर प्रो. ईश्वर पवार तथा प्रो. पुरुषोत्तम कुंदे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अंत में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. मनीष कुमार मिश्रा (हिन्दी विभाग) द्वारा किया गया। संगोष्ठी की सफलता ने महाविद्यालय को राष्ट्रीय अकादमिक मानचित्र पर एक सशक्त पहचान प्रदान की।इस आयोजन को सफल बनाने में प्राध्यापक उदय सिंह के प्रयासों को सराहते हुए संगोष्ठी संयोजक डॉ मनीष कुमार ने उनका सम्मान किया । अंत में राष्ट्रगान के साथ इस संगोष्ठी की समाप्ति की औपचारिक घोषणा हुई ।
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विश्वा अंतरराष्ट्रीय पत्रिका के जनवरी 2025 अंक में मेरे द्वारा लिखे आलेख"लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय" को प्रकाशित करने के लिए पत...
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