Sunday, September 14, 2025

हिन्दी महोत्सव 2025 उद्घाटन समारोह

 हिन्दी महोत्सव 2025 उद्घाटन एवं पानी के बुलबुले पुस्तक लोकार्पण समारोह संपन्न।

आज दिनांक 14 सितंबर 2025 को सुबह 11 बजे के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय, कल्याण (प.) में डॉ. विजय नारायण पंडित के ग़ज़ल संग्रह “पानी के बुलबुले” का लोकार्पण एवं हिन्दी साहित्य मण्डल द्वारा आयोजित “हिन्दी महोत्सव 2025” का उद्घाटन समारोह सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। प्रातः 11 से 11:30 बजे तक जलपान व चायपान का आयोजन किया गया। तत्पश्चात् 11:30 बजे मुख्य समारोह का आरंभ हुआ। समारोह अध्यक्ष : पद्मश्री गजानन माने जी, मुख्य अतिथि डॉ. सतीश पाण्डेय जी ( पूर्व अधिष्ठाता सोमैया विश्वविद्यालय), डॉ. अनिल सिंह जी (अधिष्ठाता कला एवं मानविकी संकाय, मुंबई विश्वविद्यालय)- डॉ. नरेश चंद्र जी (पूर्व प्र कुलगुरु मुंबई विश्वविद्यालय) कार्यक्रम में उपस्थित रहे। विशेष उपस्थिति श्री जय नारायण (मुन्ना) पंडित जी (वरिष्ठ समाजसेवी), के एम अग्रवाल महाविद्यालय के कार्याध्यक्ष श्री रमाशंकर चंदू तिवारी, मानद सचिव श्री ओम प्रकाश (मुन्ना) पाण्डेय, ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉ सुजीत सिंह एवं श्री अनिल पंडित की रही । एल डी सोनावाने महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ एनी एंटोनी भी इस अवसर पर उपस्थित रहीं ।

इसअवसर पर डॉ विजय नारायण पंडित के ग़ज़ल संग्रह “पानी के बुलबुले” का लोकार्पण सभी अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। वक्ताओं ने इस संग्रह की साहित्यिक गुणवत्ता, समकालीन संवेदनाओं और ग़ज़ल की परंपरा में इसके योगदान पर विचार व्यक्त किए।  “हिन्दी महोत्सव 2025” का उद्घाटन हुआ जिसमें हिन्दी की प्रासंगिकता, उसकी सांस्कृतिक भूमिका और आज के बदलते परिदृश्य में साहित्यिक उत्सवों की महत्ता पर विमर्श हुआ।

- डॉ. सतीश पाण्डेय ने हिन्दी को “भारतीय आत्मा की अभिव्यक्ति” बताया। डॉ. अनिल सिंह ने ग़ज़ल को जीवन का दर्पण और अंतःसंवेदना की संगीतमय यात्रा कहा। डॉ. नरेश चंद्र ने हिन्दी साहित्य मंडल की गतिविधियों की सराहना की। पद्मश्री गजानन माने ने हिन्दी को जनआन्दोलन और सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए नई पीढ़ी तक पहुँचाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. राजबहादुर सिंह (पूर्व उप-प्राचार्य, अग्रवाल कॉलेज) ने आभार व्यक्त किया। पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ मनीष कुमार मिश्रा ने किया। प्राध्यापक उदय सिंह, श्री विजय वास्तवा और महाविद्यालय के शिक्षकेतर कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।  यह आयोजन साहित्य, भाषा और समाज के त्रिवेणी संगम का जीवंत उदाहरण रहा। “पानी के बुलबुले” ग़ज़ल संग्रह का लोकार्पण साहित्य-जगत को एक नई कृति प्रदान करता है, वहीं “हिन्दी महोत्सव 2025” का शुभारंभ आने वाले समय में हिन्दी साहित्य और संस्कृति को व्यापक मंच उपलब्ध कराएगा।















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