Tuesday, January 21, 2020

कहीं पे धूप की चादर बिछा के बैठ गए FYBA Compulsory Sem II

कहीं पे धूप की चादर बिछा के बैठ गए
कहीं पे शाम सिरहाने लगा के बैठ गए ।

जले जो रेत में तलवे तो हमने ये देखा
बहुत से लोग वहीं छटपटा के बैठ गए ।

खड़े हुए थे अलावों की आंच लेने को
सब अपनी अपनी हथेली जला के बैठ गए ।

दुकानदार तो मेले में लुट गए यारों
तमाशबीन दुकानें लगा के बैठ गए ।

लहू लुहान नज़ारों का ज़िक्र आया तो
शरीफ लोग उठे दूर जा के बैठ गए ।

ये सोच कर कि दरख्तों में छांव होती है
यहाँ बबूल के साए में आके बैठ गए ।https://youtu.be/ZAzkjrSSE0s

No comments:

Post a Comment

SYBA Semester-IV Subject Selections (A.Y. 2025–26)

 SYBA Semester-IV Subject Selections (A.Y. 2025–26) Following are the Subjects for SYBA Semester-IV NEP-2020. Please take note of it. Histor...