Saturday, October 31, 2026
Saket College MA Viva
Tuesday, October 27, 2026
MA viva Saket College
Monday, October 12, 2026
Abstract accepted
Monday, October 5, 2026
Sunday, September 27, 2026
के सी कॉलेज, मुम्बई में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में सहभागिता
दिनांक 26 सितम्बर 2026 को के सी कॉलेज, मुम्बई में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में सहभागिता
। भाई डॉ अजीत राय को सफल आयोजन की हार्दिक बधाई।
Thursday, September 24, 2026
रामधारी सिंह दिनकर : राष्ट्रचेतना और मानवीय संवेदना के कवि
रामधारी सिंह दिनकर : राष्ट्रचेतना और मानवीय संवेदना के कवि
रामधारी सिंह दिनकर की जयंती हिंदी साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक चेतना के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। 23 सितंबर 1908 को बिहार के सिमरिया गाँव में जन्मे दिनकर ने हिंदी कविता को राष्ट्रीय स्वाभिमान, सामाजिक चेतना, संघर्ष और मानवीय संवेदना की सशक्त अभिव्यक्ति दी। उनकी रचनाओं में एक ओर भारतीय इतिहास और मिथक की गहरी उपस्थिति दिखाई देती है, तो दूसरी ओर आधुनिक मनुष्य की बेचैनी और उसके प्रश्न भी सामने आते हैं।
दिनकर का साहित्य ऐसे समय में विकसित हुआ जब देश स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से गुजर रहा था। इसलिए उनकी कविताओं में स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और अन्याय के प्रतिरोध की तीव्र भावना दिखाई देती है। ‘हुंकार’, ‘रेणुका’ और ‘द्वंद्वगीत’ जैसी कृतियों में उनकी राष्ट्रीय चेतना स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त हुई। उनकी प्रसिद्ध कविता ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ की पंक्ति जनशक्ति और लोकतांत्रिक चेतना का प्रभावशाली प्रतीक बन गई।
दिनकर केवल ओज और वीरता के कवि नहीं थे। उनके साहित्य का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष प्रेम, सौंदर्य और मानवीय संवेदना है। ‘उर्वशी’ में प्रेम, काम, सौंदर्य और मनुष्य के आंतरिक द्वंद्व को उन्होंने दार्शनिक स्तर पर प्रस्तुत किया। वहीं ‘रश्मिरथी’ में महाभारत के कर्ण को केंद्र में रखकर जन्म, जाति, सामाजिक प्रतिष्ठा, मित्रता, दान और नियति जैसे प्रश्नों पर विचार किया। कर्ण के माध्यम से दिनकर ने उस सामाजिक व्यवस्था पर भी प्रश्न उठाया जिसमें मनुष्य का मूल्य उसके कर्म से अधिक उसके जन्म से निर्धारित किया जाता है।
दिनकर की एक बड़ी विशेषता यह है कि वे भारतीय मिथकों और इतिहास को केवल अतीत की कथा के रूप में नहीं देखते। वे उनसे वर्तमान के प्रश्नों को जोड़ते हैं। ‘कुरुक्षेत्र’ में महाभारत के युद्ध के माध्यम से हिंसा, शांति, न्याय और मानवता के प्रश्न उठाए गए हैं। इसी कारण उनका साहित्य अपने समय से आगे जाकर आज भी पाठकों को विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
दिनकर को प्रायः ‘राष्ट्रकवि’ के रूप में स्मरण किया जाता है। यह संबोधन उनके साहित्य में उपस्थित व्यापक राष्ट्रीय चेतना और जनभावना से जुड़ा है। हालांकि उनके साहित्य को केवल राष्ट्रवादी कवि की सीमा में बाँधना उनके रचनात्मक व्यक्तित्व को छोटा करना होगा। वे इतिहास, राजनीति, संस्कृति, प्रेम, मिथक, सामाजिक असमानता और मनुष्य की गरिमा—इन सभी विषयों पर गंभीरता से विचार करने वाले लेखक थे।
उनकी जयंती हमें केवल उनकी कविताएँ पढ़ने का अवसर नहीं देती, बल्कि यह सोचने का अवसर भी देती है कि साहित्य का समाज और समय के प्रति क्या दायित्व है। दिनकर का साहित्य हमें बताता है कि सच्चा साहित्य केवल उत्तर नहीं देता; वह अपने समय के सामने नए और असुविधाजनक प्रश्न भी खड़े करता है। यही उनकी साहित्यिक प्रासंगिकता है और यही उनकी स्थायी विरासत भी।
Wednesday, September 23, 2026
अतिथि व्याख्यान
*दक्ष स्किल इंडिया*
(लघुकथा शोध केन्द्र समिति का उपक्रम)
के तत्वावधान में आयोजित
*हिंदी पखवाड़ा 2026*
निज भाषा उन्नति अहै
दिनांक - 23 सितंबर 2026
*समय - सायं 6.30 बजे से*
ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।https://meet.google.com/vfe-amfj-qfu
Tuesday, September 22, 2026
PhD report Uzbekistan
के. एम. अग्रवाल कॉलेज के स्थापना दिवस पर भव्य समारोह; पूर्व मुख्य सचिव श्री श्रीकांत सिंह ने डॉ. आर. बी. सिंह पब्लिक स्कूल के प्रशासनिक भवन का किया उद्घाटन
के. एम. अग्रवाल कॉलेज के स्थापना दिवस पर भव्य समारोह; पूर्व मुख्य सचिव श्री श्रीकांत सिंह ने डॉ. आर. बी. सिंह पब्लिक स्कूल के प्रशासनिक भवन का किया उद्घाटन
कल्याण, 22 सितंबर 2026।
के. एम. अग्रवाल कॉलेज, कल्याण में 22 सितंबर 2026 को कॉलेज के स्थापना दिवस के अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। स्थापना दिवस समारोह में संस्था से जुड़े पदाधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा आमंत्रित अतिथियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस अवसर पर संस्था की शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर विस्तार और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के संकल्प को दोहराया गया।
स्थापना दिवस के अवसर पर प्रातः 7:30 बजे से 11:30 बजे तक पूजा एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन के. एम. अग्रवाल कॉलेज, कल्याण-पडघा रोड, कल्याण (पश्चिम) परिसर में किया गया। कार्यक्रम में संस्था से जुड़े पदाधिकारियों, शिक्षकों एवं अन्य सदस्यों ने उपस्थित होकर स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ दीं।
समारोह का प्रमुख आकर्षण डॉ. आर. बी. सिंह पब्लिक स्कूल के प्रस्तावित प्रशासनिक भवन (Admin Block) का उद्घाटन रहा। महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मुख्य सचिव एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्री श्रीकांत सिंह ने इस प्रशासनिक भवन का उद्घाटन किया। उनके इस अवसर पर उपस्थित रहने से कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया। संस्था की ओर से श्री सिंह का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
यह कार्यक्रम डॉ. आर. बी. सिंह पब्लिक स्कूल, कल्याण-पडघा रोड, बापगांव, तहसील भिवंडी में संपन्न हुआ। प्रस्तावित विद्यालय के प्रशासनिक भवन को संस्था की शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष डॉ. विजय नारायण पंडित सहित संस्था के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कार्यकारी अध्यक्ष श्री रामाशंकर तिवारी, उपाध्यक्ष श्री एल. एस. उपाध्याय, महासचिव श्री ओमप्रकाश पांडेय, संयुक्त सचिव डॉ. सुजीत आर. सिंह, संयुक्त सचिव श्री अनंत वी. गावली, संयुक्त सचिव श्री अनिल बी. पंडित, कोषाध्यक्ष श्री दिनेश सोमानी, सदस्य श्री कांतिलाल एस. जैन, सदस्य श्री रम्मीलन मिश्रा, सदस्य श्री किरण शुक्ला तथा सदस्य श्री वसंतजी देढिया सहित संस्था के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।
कार्यक्रम में के. एम. अग्रवाल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अनिता मन्ना की भी महत्वपूर्ण उपस्थिति रही। कॉलेज परिवार की ओर से उन्होंने स्थापना दिवस के अवसर पर सभी उपस्थित अतिथियों, संस्था के पदाधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संस्था के शैक्षणिक विकास में कॉलेज की भूमिका तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों को भी इस अवसर पर रेखांकित किया गया।
स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि संस्था की अब तक की शैक्षणिक यात्रा को स्मरण करने और भविष्य की योजनाओं को गति देने का अवसर भी रहा। बदलते शैक्षणिक परिवेश में विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक सुविधाओं, बेहतर आधारभूत संरचना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। इसी दृष्टि से नए प्रशासनिक भवन और विद्यालय से संबंधित विकास कार्यों को संस्था के विस्तार की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने शिक्षा को समाज के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए शैक्षणिक संस्थाओं की सामाजिक जिम्मेदारी पर बल दिया। विद्यालय और महाविद्यालय केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम आधारित ज्ञान देने वाले केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, सामाजिक चेतना, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदार नागरिकता के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. आर. बी. सिंह पब्लिक स्कूल के प्रस्तावित प्रशासनिक भवन का उद्घाटन इसी व्यापक शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए भवन के माध्यम से विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित रूप देने और भविष्य में शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार के लिए आधार तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
समारोह के दौरान संस्था के अध्यक्ष डॉ विजय पंडित ने आपसी सहयोग, शैक्षणिक गुणवत्ता और संस्थागत विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। स्थापना दिवस के अवसर पर संस्था की उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। उपस्थित सदस्यों ने संस्था की शैक्षणिक परंपरा को आगे बढ़ाने और विद्यार्थियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
एचबीजेएसएस के के. एम. अग्रवाल कॉलेज की स्थापना दिवस गतिविधियों ने संस्था के शैक्षणिक एवं संस्थागत विकास की निरंतरता को रेखांकित किया। एक ओर जहाँ कॉलेज में स्थापना दिवस के अवसर पर पूजा एवं कार्यक्रम आयोजित किया गया, वहीं दूसरी ओर डॉ. आर. बी. सिंह पब्लिक स्कूल के प्रस्तावित प्रशासनिक भवन का उद्घाटन संस्था के विस्तार की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम रहा।
कार्यक्रम के अंत में संस्था की ओर से सभी अतिथियों, पदाधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं उपस्थित सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। संस्था ने भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में अपने कार्यों को व्यापक बनाने तथा विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
Saturday, September 19, 2026
Conference News
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विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी¸ मरो परन्तु यों मरो कि याद जो करे सभी। हुई न यों सु–मृत्यु तो वृथा मरे¸ वृथा जिये¸ मरा नहीं वहीं...





















